शिक्षा के प्रतिभागी

शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति की अमूल्य धरोहर है। जो बालक को अपने माता पिता से वरदान में मिलती है। आज के इस युग मे  शायद ही कोई ऐसा माता पिता होगा जो अपने बच्चे को शिक्षा में प्रतिभागी न होने देता हो। बच्चों का जीवन कोमल पुष्प के समान होता है वे चाहें तो समाज की दिशा बदल सकते हैं वे प्रेरित कर सकते है। जिस तरह पुष्प वातावरण में सुगंध फैला कर मन को आनन्दित कर देता है शिक्षा उसी की समानार्थी है। शिक्षा समाज मे सुगंध फैलाने का काम कर सकती है यदि उसका माली एक अच्छा रखवाला हो। शिक्षा के प्रतिभागी वह हर बच्चा है हो जो पाना चाहता है। इसे पाने का अधिकार सबको है । आप इससे किसी को वंचित नही कर सकते ।

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