धन की अहमियत

नमस्कार दोस्तो आज के इस 21 वीं सदी में जब हम चांद तक पहुंच गए है या कहो लाल ग्रह तक। कुछ समय पूर्व तक लोगो मे इस बात का गुरुर था कि वो धनवान हैं और खुद की पहचान वो धन से बनाते हैं। कहीं हद तक यह सही भी साबित हो रहा था। क्योंकि कुछ समय पूर्व तक धन अपने आप मे एक शक्ति समान था। जैसे पूर्व के युग जादू की छड़ी या चमत्कारी ताबीज,या उड़न दरी आदि। ये सब  देखने सुनने में अच्छा लगता था लेकिन आज की वास्तविकता धन उसी का एक स्वरूप थी या है। और शायद आगे फिर होगी। महामारी के दौर ने जबसे पांव पसारा है। तब से धन की कीमत को व्यक्ति के दायरे ने बदल के रख दिया । यानी आपका जितना अच्छा दायरा या जितनी पहचान सब धरि की धरी रह गयी
" धन भी न आया काम । जब बिगडे सारे काम।।

इस कहावत से अंदाजा लगाया जा सकता है। कि स्तिथि क्या रही होगी। लोगो को ऑक्सिजन नही मिली कितना ही धन पानी की तरह लोगो ने बहाया लेकिन मानव मानव को न बचा पाया।
सच्चाई ये है कि गुरुर किसी पदार्थ का नही रुकता । 

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